Saturday, February 14, 2026

काफ़ी है

थक गया हूँ, दूर नहीं जाऊँगा 
धँस रहा हूँ दलदल में, निकल नहीं पाऊँगा 
हाथ दे दे तू ज़रा, साथ दे दे तू मेरा 
ना भी दे तू तो अगर 
तेरी हँसी, तेरी बातें, काफ़ी हैं 
वो चंद मुलाक़ातें, काफ़ी हैं। 

जी तो लूँगा तेरे बिन भी 
गिन ही लूँगा कुछ ही दिन सही
काश होती तेरी-मेरी, एक और ज़िंदगी 
ना भी होती तो अगर 
सोच लूँगा कि यही बस, काफ़ी है 
तू नहीं है, पर तेरी यादें, काफ़ी हैं। 

क्या किसी मोड़ पर, फिर से मिलोगे तुम 
देख लोगे तो, कुछ कहोगे तुम 
सच होगा ये ख्याल, पूरे होंगे ये सवाल?
ना भी हों पूरे अगर
बस तेरी एक ख़बर ही, काफ़ी है 
तेरी खुशियाँ जहाँ भी हों, काफ़ी हैं।

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