Sunday, February 8, 2026

किसी को तो खुशी मिलेगी

नफरत की आदत है या मेरी सोच, 
भूल जाऊं या सुलगता रहूं
भूल जाता हूं, ढोंग करता हूं, 
मेरे इस दिखावे से
किसी को तो खुशी मिलेगी।

रोज की कड़वाहट है या ज़िंदगी, 
बर्दाश्त करूं या बिखर जाऊं 
बर्दाश्त कर लेता हूं, ये दिन भी निकल जाएगा, 
चुप रहूंगा तो 
किसी को तो खुशी मिलेगी।

ज़हर का घोल है या पानी है, 
पी कर देख लूं या सोचता रहूं
पी लेता हूं, क्या ही होगा, 
ज़हर भी हुआ तो 
किसी को तो खुशी मिलेगी।

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