Monday, February 9, 2026

जो इतनी बातों का समय होता

मैं नहीं मानता तुम जा रहे हो 
रोज़ ये बता कर मुस्कुरा रहे हो
पूछते हो मुझसे कैसा लगेगा तुझे
मैं हँस के तुम्हें टाल देता हूँ
तुम कहते हो कुछ तो बोलो
मैं बोलता ज़रूर, फिर चुप ना होता
जो इतनी बातों का समय होता

मुझे नहीं लगता तुम्हारी याद आएगी
तुम्हें यकीन है वो मुझे बहुत सताएगी 
मारते हो ताना, भुला दूँगा तुम्हें 
मैं बस तुमसे ये सवाल करता हूँ 
कितनी दूर जा रहे हो, क्या लौटोगे कभी 
तुम बताते जो तुम्हें पता होता 
जो इतनी बातों का समय होता

मैं नहीं सोचता कोई और आएगा
तुम्हारी जगह कोई ले पाएगा 
चिढ़ाते हो मुझे, नये दोस्त बनेंगे 
मैं चुप रह कर सोचता हूँ 
क्या इतना आसान है किसी से जुड़ जाना 
शायद हाँ, अगर सौ सालों की बातों का एक हफ़्ता होता 
जो इतनी बातों का समय होता

Sunday, February 8, 2026

किसी को तो खुशी मिलेगी

नफरत की आदत है या मेरी सोच, 
भूल जाऊं या सुलगता रहूं
भूल जाता हूं, ढोंग करता हूं, 
मेरे इस दिखावे से
किसी को तो खुशी मिलेगी।

रोज की कड़वाहट है या ज़िंदगी, 
बर्दाश्त करूं या बिखर जाऊं 
बर्दाश्त कर लेता हूं, ये दिन भी निकल जाएगा, 
चुप रहूंगा तो 
किसी को तो खुशी मिलेगी।

ज़हर का घोल है या पानी है, 
पी कर देख लूं या सोचता रहूं
पी लेता हूं, क्या ही होगा, 
ज़हर भी हुआ तो 
किसी को तो खुशी मिलेगी।

Tuesday, February 3, 2026

ईंटों से बना एक मकान है

 ईंटों से बना एक मकान है, खिड़कियाँ खुली हैं
अंदर है अंधेरा, बत्तियाँ बुझी हैं
खुशियों का पूरा इंतज़ाम है, हँसियाँ अनसुनी है
अरे खींच दो ये पर्दा रोशनी छिपी है

मेरी हरकतों का कारनामा, चर्चा हो रही है
कहानी है पुरानी, बातें नयी हैं
मैं अकेला परेशान था, अब दुनिया जुड़ रही है
सबके मुँह में राम, बगल में छुरी है

फूलों से भरा एक बागान है, तितलियाँ उड़ रही हैं
पर देखो इनकी क्यारी, मुरझा रही है
इन फूलों से पिरोयी ये माला, क्या खूब सज रही है
पर काँटों भरी है टहनी, बहुत चुभ रही है

तुमको मेरा थोड़ा भी ध्यान है, मुझे याद आ रही है
कुछ मीठी मीठी बातें, तानों में सनी हैं
मिलोगे करोगे दो बातें, ये शाम कह रही है
कोई उम्मीद तो नहीं है, बस आस रह गयी है