Tuesday, February 3, 2026

ईंटों से बना एक मकान है

 ईंटों से बना एक मकान है, खिड़कियाँ खुली हैं
अंदर है अंधेरा, बत्तियाँ बुझी हैं
खुशियों का पूरा इंतज़ाम है, हँसियाँ अनसुनी है
अरे खींच दो ये पर्दा रोशनी छिपी है

मेरी हरकतों का कारनामा, चर्चा हो रही है
कहानी है पुरानी, बातें नयी हैं
मैं अकेला परेशान था, अब दुनिया जुड़ रही है
सबके मुँह में राम, बगल में छुरी है

फूलों से भरा एक बागान है, तितलियाँ उड़ रही हैं
पर देखो इनकी क्यारी, मुरझा रही है
इन फूलों से पिरोयी ये माला, क्या खूब सज रही है
पर काँटों भरी है टहनी, बहुत चुभ रही है

तुमको मेरा थोड़ा भी ध्यान है, मुझे याद आ रही है
कुछ मीठी मीठी बातें, तानों में सनी हैं
मिलोगे करोगे दो बातें, ये शाम कह रही है
कोई उम्मीद तो नहीं है, बस आस रह गयी है

Friday, January 30, 2026

मन में मेरे जो एक बात है

मन में मेरे जो एक बात है 
खुशी है, असमंजस है, कुछ खास है 
मन में दोहराता हूँ, शायद बोलना भी चाहता हूँ, 
कहने से हिचकता हूँ, मौका मिलने पर भी झिझकता हूँ 
पता नहीं सोच है, ख्याल है, या बस एक अहसास है।

मन में मेरे जो एक बात है 
गुस्सा है, चिंता है, प्यार है
साथ है अलग सा, अनोखा सा एक रिश्ता है
प्यारी सी बातें हैं, बोलती हुई रातें हैं
हम रूठते हैं, मनाते भी हैं, फिर भूल जाते हैं।

मन में मेरे जो एक बात है 
कुछ महीने, कुछ दिन, बस कुछ पल हैं 
मुझे पता है, उसे पता है 
वो कुछ कहती है, मैं कुछ समझता हूँ
हँसते-हँसते रोता हूँ और रोते-रोते हँसता हूँ।

मन में मेरे जो एक बात है 
अच्छा लगता है, मन करता है, देखता रहूँ 
बहुत सी बातें हैं, कुछ मुलाकातें हैं 
इतना ही साथ है, फिर बस याद रह जाएगी 
मन में जो बात है, वो मन में रह जाएगी। 

Wednesday, January 28, 2026

ये कैसी उथल पुथल है

मन में है सौ तरह की बातें 
कुछ मीठी हैं, कुछ नमकीन 
जुबां पे आती अटक जाती है 
भूलो तो याद आती है 
कभी कभी सोचता हूँ, ऐसा चलता रहेगा, या बस आजकल है
ये कैसी उथल पुथल है

अपने हैं तो वो साथ रहते हैं 
हँसते हैं, रोते हैं, लड़ते हैं, मनाते हैं 
पास हो कर दूर जाते हैं 
शाम को लौट आते हैं 
रिश्तों ने जोड़ा है, या साथ रहना ही बस एक हल है 
ये कैसी उथल पुथल है

मैं मेरा मन हूँ, या जकड़ा हुआ एक बुत हूँ
 कुछ सोचता हूँ, कुछ करता भी हूँ 
करते करते डरता भी हूँ 
उंगली दिखा कर अकड़ता भी हूँ 
खुश हूँ मुस्कुरा रहा हूँ, या अपने ही मन का छल है 
ये कैसी उथल पुथल है