Saturday, February 14, 2026

काफ़ी है

थक गया हूँ, दूर नहीं जाऊँगा 
धँस रहा हूँ दलदल में, निकल नहीं पाऊँगा 
हाथ दे दे तू ज़रा, साथ दे दे तू मेरा 
ना भी दे तू तो अगर 
तेरी हँसी, तेरी बातें, काफ़ी हैं 
वो चंद मुलाक़ातें, काफ़ी हैं। 

जी तो लूँगा तेरे बिन भी 
गिन ही लूँगा कुछ ही दिन सही
काश होती तेरी-मेरी, एक और ज़िंदगी 
ना भी होती तो अगर 
सोच लूँगा कि यही बस, काफ़ी है 
तू नहीं है, पर तेरी यादें, काफ़ी हैं। 

क्या किसी मोड़ पर, फिर से मिलोगे तुम 
देख लोगे तो, कुछ कहोगे तुम 
सच होगा ये ख्याल, पूरे होंगे ये सवाल?
ना भी हों पूरे अगर
बस तेरी एक ख़बर ही, काफ़ी है 
तेरी खुशियाँ जहाँ भी हों, काफ़ी हैं।

Monday, February 9, 2026

जो इतनी बातों का समय होता

मैं नहीं मानता तुम जा रहे हो 
रोज़ ये बता कर मुस्कुरा रहे हो
पूछते हो मुझसे कैसा लगेगा तुझे
मैं हँस के तुम्हें टाल देता हूँ
तुम कहते हो कुछ तो बोलो
मैं बोलता ज़रूर, फिर चुप ना होता
जो इतनी बातों का समय होता

मुझे नहीं लगता तुम्हारी याद आएगी
तुम्हें यकीन है वो मुझे बहुत सताएगी 
मारते हो ताना, भुला दूँगा तुम्हें 
मैं बस तुमसे ये सवाल करता हूँ 
कितनी दूर जा रहे हो, क्या लौटोगे कभी 
तुम बताते जो तुम्हें पता होता 
जो इतनी बातों का समय होता

मैं नहीं सोचता कोई और आएगा
तुम्हारी जगह कोई ले पाएगा 
चिढ़ाते हो मुझे, नये दोस्त बनेंगे 
मैं चुप रह कर सोचता हूँ 
क्या इतना आसान है किसी से जुड़ जाना 
शायद हाँ, अगर सौ सालों की बातों का एक हफ़्ता होता 
जो इतनी बातों का समय होता

Sunday, February 8, 2026

किसी को तो खुशी मिलेगी

नफरत की आदत है या मेरी सोच, 
भूल जाऊं या सुलगता रहूं
भूल जाता हूं, ढोंग करता हूं, 
मेरे इस दिखावे से
किसी को तो खुशी मिलेगी।

रोज की कड़वाहट है या ज़िंदगी, 
बर्दाश्त करूं या बिखर जाऊं 
बर्दाश्त कर लेता हूं, ये दिन भी निकल जाएगा, 
चुप रहूंगा तो 
किसी को तो खुशी मिलेगी।

ज़हर का घोल है या पानी है, 
पी कर देख लूं या सोचता रहूं
पी लेता हूं, क्या ही होगा, 
ज़हर भी हुआ तो 
किसी को तो खुशी मिलेगी।