ईंटों से बना एक मकान है, खिड़कियाँ खुली हैं
अंदर है अंधेरा, बत्तियाँ बुझी हैं
खुशियों का पूरा इंतज़ाम है, हँसियाँ अनसुनी है
अरे खींच दो ये पर्दा रोशनी छिपी है
अंदर है अंधेरा, बत्तियाँ बुझी हैं
खुशियों का पूरा इंतज़ाम है, हँसियाँ अनसुनी है
अरे खींच दो ये पर्दा रोशनी छिपी है
मेरी हरकतों का कारनामा, चर्चा हो रही है
कहानी है पुरानी, बातें नयी हैं
मैं अकेला परेशान था, अब दुनिया जुड़ रही है
सबके मुँह में राम, बगल में छुरी है
फूलों से भरा एक बागान है, तितलियाँ उड़ रही हैं
पर देखो इनकी क्यारी, मुरझा रही है
इन फूलों से पिरोयी ये माला, क्या खूब सज रही है
पर काँटों भरी है टहनी, बहुत चुभ रही है
तुमको मेरा थोड़ा भी ध्यान है, मुझे याद आ रही है
कुछ मीठी मीठी बातें, तानों में सनी हैं
मिलोगे करोगे दो बातें, ये शाम कह रही है
कोई उम्मीद तो नहीं है, बस आस रह गयी है