मन में है सौ तरह की बातें
कुछ मीठी हैं, कुछ नमकीन
जुबां पे आती अटक जाती है
भूलो तो याद आती है
कभी कभी सोचता हूँ, ऐसा चलता रहेगा, या बस आजकल है
ये कैसी उथल पुथल है
कुछ मीठी हैं, कुछ नमकीन
जुबां पे आती अटक जाती है
भूलो तो याद आती है
कभी कभी सोचता हूँ, ऐसा चलता रहेगा, या बस आजकल है
ये कैसी उथल पुथल है
अपने हैं तो वो साथ रहते हैं
हँसते हैं, रोते हैं, लड़ते हैं, मनाते हैं
पास हो कर दूर जाते हैं
शाम को लौट आते हैं
रिश्तों ने जोड़ा है, या साथ रहना ही बस एक हल है
ये कैसी उथल पुथल है
मैं मेरा मन हूँ, या जकड़ा हुआ एक बुत हूँ
कुछ सोचता हूँ, कुछ करता भी हूँ
करते करते डरता भी हूँ
उंगली दिखा कर अकड़ता भी हूँ
खुश हूँ मुस्कुरा रहा हूँ, या अपने ही मन का छल है
ये कैसी उथल पुथल है